उत्तराखंडधर्म-कर्मराशिफल

*आज आपका राशिफल एवं प्रेरक प्रसंग- भय-हमें गलत कार्यों में धकेलता है*


*आज का पञ्चांग*

*दिनांक:- 04/04/2025, शुक्रवार*
*सप्तमी, शुक्ल पक्ष,*
*चैत्र*
(समाप्ति काल)

तिथि———- सप्तमी 20:12:04 तक
पक्ष————————-शुक्ल
नक्षत्र————आर्द्रा 29:19:27
योग————-शोभन 21:44:07
करण————– गर 08:51:15
करण———- वणिज 20:12:04
वार———————– शुक्रवार
माह————————– चैत्र
चन्द्र राशि—————- मिथुन
सूर्य राशि——————- मीन
रितु————————–वसंत
आयन——————-उत्तरायण
संवत्सर—————– विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर) ————–सिद्धार्थी
विक्रम संवत————– 2082
गुजराती संवत———— 2081
शक संवत—————- 1947
कलि संवत—————- 5126
सूर्योदय————– 06:07:36
सूर्यास्त————— 18:36:59
दिन काल———— 12:29:23
रात्री काल————- 11:29:30
चंद्रोदय————– 10:38:20
चंद्रास्त—————- 25:24:23
लग्न—- मीन 20°17′ , 350°17′
सूर्य नक्षत्र—————– रेवती
चन्द्र नक्षत्र—————— आर्द्रा
नक्षत्र पाया——————-रजत

*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*

कु—- आर्द्रा 11:38:32

घ—- आर्द्रा 17:29:33

ङ—- आर्द्रा 23:23:11

छ—- आर्द्रा 29:19:27

*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= मीन 20°40, रेवती 2 दो
चन्द्र= मिथुन 06°30 , आर्द्रा 1 कु
बुध =मीन 03°52 ‘ पू o भा o 4 दी
शु क्र= मीन 02°05, पू o फाo’ 4 दी
मंगल=कर्क 00°30 ‘ पुनर्वसु ‘ 4 ही
गुरु=वृषभ 22°30 रोहिणी, 4 वु
शनि=मीन 00°28 ‘ पू o भा o , 4 दी
राहू=(व) मीन 02°25 पू o भा o, 4 दी
केतु= (व)कन्या 02°25 उ oफा o 2 टो
============================

*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*

राहू काल 10:49 – 12:22 अशुभ
यम घंटा 15:30 – 17:03 अशुभ
गुली काल 07:41 – 09: 15अशुभ
अभिजित 11:57 – 12:47 शुभ
दूर मुहूर्त 08:37 – 09:27 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:47 – 13:37 अशुभ
वर्ज्यम 13:59 – 15:32 अशुभ
प्रदोष 18:37 – 20:57 शुभ

💮चोघडिया, दिन
चर 06:08 – 07:41 शुभ
लाभ 07:41 – 09:15 शुभ
अमृत 09:15 – 10:49 शुभ
काल 10:49 – 12:22 अशुभ
शुभ 12:22 – 13:56 शुभ
रोग 13:56 – 15:30 अशुभ
उद्वेग 15:30 – 17:03 अशुभ
चर 17:03 – 18:37 शुभ

🚩चोघडिया, रात
रोग 18:37 – 20:03 अशुभ
काल 20:03 – 21:29 अशुभ
लाभ 21:29 – 22:56 शुभ
उद्वेग 22:56 – 24:22* अशुभ
शुभ 24:22* – 25:48* शुभ
अमृत 25:48* – 27:14* शुभ
चर 27:14* – 28:40* शुभ
रोग 28:40* – 30:07* अशुभ

💮होरा, दिन
शुक्र 06:08 – 07:10
बुध 07:10 – 08:13
चन्द्र 08:13 – 09:15
शनि 09:15 – 10:17
बृहस्पति 10:17 – 11:20
मंगल 11:20 – 12:22
सूर्य 12:22 – 13:25
शुक्र 13:25 – 14:27
बुध 14:27 – 15:30
चन्द्र 15:30 – 16:32
शनि 16:32 – 17:35
बृहस्पति 17:35 – 18:37

🚩होरा, रात
मंगल 18:37 – 19:34
सूर्य 19:34 – 20:32
शुक्र 20:32 – 21:29
बुध 21:29 – 22:27
चन्द्र 22:27 – 23:24
शनि 23:24 – 24:22
बृहस्पति 24:22* – 25:19
मंगल 25:19* – 26:17
सूर्य 26:17* – 27:14
शुक्र 27:14* – 28:12
बुध 28:12* – 29:09
चन्द्र 29:09* – 30:07

*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*

मीन > 06:10 से 06:34 तक
मेष > 06:34 से 08:14 तक
वृषभ > 08:14 से 10:12 तक
मिथुन > 10:12 से 12:30 तक
कर्क > 12:30 से 14:46 तक
सिंह > 14:46 से 17:00 तक
कन्या > 17:00 से 19:16 तक
तुला > 19:16 से 21:28 तक
वृश्चिक > 21:28 से 23:52 तक
धनु > 23:52 से 02:08 तक
मकर > 02:08 से 03:42 तक
कुम्भ > 03:42 से 05:06 तक
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*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

*💮दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*

*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*

7 + 6 + 1 = 14 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

बुध ग्रह मुखहुति

*💮 शिव वास एवं फल -:*

7 + 7 + 5 = 19 ÷ 7 = 5 शेष

ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक

*🚩भद्रा वास एवं फल -:*

*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*

सांय 20:12 से प्रारम्भ

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*

*दुर्गा पूजन (बंगाल)*

*माखनलाल चतुर्वेदी जयंती*

*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*

यत्रोदकस्तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
नहंतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्र यन्तः ।।
।। चा o नी o।।

हंस वहा रहते है जहा पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे.

*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*

गीता -:दैवासुरसम्पद्विभागयोग :- अo-15

आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः।,
ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान्‌॥,

वे आशा की सैकड़ों फाँसियों से बँधे हुए मनुष्य काम-क्रोध के परायण होकर विषय भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धनादि पदार्थों का संग्रह करने की चेष्टा करते हैं॥,12॥,

*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
योजना फलीभूत होगी। कार्यपद्धति में सुधार होगा। कार्यसिद्धि से प्रसन्नता रहेगी। मेहनत सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कारोबार मनोनुकूल लाभ देगा। शेयर मार्केट में जल्दबाजी से बचें। विवेक का प्रयोग करें। भाग्य का साथ मिलेगा। वरिष्ठ व्यक्तियों का मार्गदर्शन मिलेगा।

🐂वृष
अध्यात्म में रुचि रहेगी। किसी धार्मिक आयोजन में भाग लेने का मौका हाथ आएगा। सुख-शांति बने रहेंगे। कारोबार मनोनुकूल चलेगा। मित्रों का सहयोग लाभ में वृद्धि करेगा। लंबित कार्य पूर्ण होंगे। निवेश शुभ रहेगा। प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। प्रमाद न करें।

👫मिथुन
वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में सावधानी रखें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। किसी भी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। कारोबार से लाभ होगा। निवेश में जल्दबाजी न करें। आय बनी रहेगी। थकान व कमजोरी रह सकती है। अज्ञात भय रहेगा। अनहोनी की आशंका रहेगी।

🦀कर्क
काम में मन नहीं लगेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। आय में निश्चितता रहेगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। इच्‍छाशक्ति प्रबल करें। फालतू खर्च होगा। शत्रुओं से सावधानी आवश्यक है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। कोई भी निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। वाणी पर नियंत्रण रखें।

🐅सिंह
डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नए काम हाथ में आएंगे। कारोबारी वृद्धि से प्रसन्नता रहेगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। अज्ञात भय रहेगा। पारिवारिक सहयोग से प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें।

🙍‍♀️कन्या
नवीन वस्त्राभूषण पर व्यय होगा। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। नए काम मिल सकते हैं। कार्य से संतुष्टि रहेगी। प्रसन्नता तथा उत्साह का वातावरण बनेगा। कारोबार लाभदायक रहेगा। निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। प्रमाद से बचें।

⚖️तुला
भूमि व भवन की खरीद-फरोख्त लाभदायक रहेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। कुसंगति से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। निवेशादि शुभ रहेंगे। रोजगार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। किसी बड़े काम में हाथ डाल पाएंगे।

🦂वृश्चिक
राजकीय सहयोग से कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलने से खिन्नता रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। आय में वृद्धि होगी। समय की अनुकूलता मिलेगी। आलस्य हावी रहेगा। घर में सुख-शांति रहेगी। लाभ होगा।

🏹धनु
रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। प्रसन्नता तथा मनोरंजन के साधन उपलब्ध होंगे। कारोबार लाभदायक रहेगा। भाइयों से सहयोग मिलेगा। कुसंगति से हानि होगी। नौकरी में प्रशंसा प्राप्त होगी। जल्दबाजी न करें। जोखिम व जमानत के कार्य बि‍लकुल न करें।

🐊मकर
समय पर बाहर से धन नहीं मिलने से निराशा रहेगी। हल्की हंसी-मजाक करने से बचें। नौकरी में अधिकारी अधिक की अपेक्षा करेंगे। मातहतों का साथ नहीं मिलेगा। थकान रहेगी। व्यवसाय-व्यापार से मनोनुकूल लाभ होगा। बुरी खबर प्राप्त हो सकती है। मेहनत अधिक होगी। लाभ के अवसर टलेंगे।

🍯कुंभ
पुराने साथियों तथा रिश्तेदारों से मुलाकात सुखद रहेगी। अच्‍छे समाचार प्राप्त होंगे। मान बढ़ेगा। किसी नए उपक्रम को प्रारंभ करने पर विचार होगा। लंबी यात्रा की इच्छा रहेगी। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाजी न करें।

🐟मीन
सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। धन प्राप्ति सु्गम होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सभी काम समय पर होने से प्रशंसा प्राप्त होगी। समय की अनुकूलता का लाभ लें। पारिवारिक चिंताओं में कमी होगी। प्रमाद न करें।

*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*

*🌳 भय-हमें गलत कार्यों में धकेलता है 🌳*

एक वन में एक ऋषि रहते थे. उनके डेरे पर बहुत दिनों से एक चूहा भी रहता आ रहा था. यह चूहा ऋषि से बहुत प्यार करता था. जब वे तपस्या में मग्न होते तो वह बड़े आनंद से उनके पास बैठा भजन सुनता रहता.बयहाँ तक कि वह स्वयं भी ईश्वर की उपासना करने लगा था।

लेकिन कुत्ते-बिल्ली और चील-कौवे आदि से वह सदा डरा-डरा और सहमा हुआ सा रहता. एक बार ऋषि के मन में उस चूहे के प्रति बहुत दया आ गयी. वे सोचने लगे कि यह बेचारा चूहा हर समय डरा-सा रहता है, क्यों न इसे शेर बना दिया जाए. ताकि इस बेचारे का डर समाप्त हो जाए और यह बेधड़क होकर हर स्थान पर घूम सके।

ऋषि सिद्ध थे और बहुत बड़ी दैवीय शक्ति के स्वामी थे. उन्होंने अपनी शक्ति के बल पर उस चूहे को शेर बना दिया और सोचने लगे कि अब यह चूहा किसी भी जानवर से नहीं डरेगा और निर्भय होकर पूरे जंगल में घूम सकेगा।

लेकिन चूहे से शेर बनते ही चूहे की सारी सोच बदल गई. वह सारे वन में बेधड़क घूमता. उससे अब सारे जानवर डरने लगे और प्रणाम करने लगे. उसकी जय-जयकार होने लगी. किन्तु ऋषि यह बात जानते थे कि यह मात्र एक चूहा है,वास्तव में शेर नहीं है।

अतः ऋषि उससे चूहा समझकर ही व्यवहार करते. यह बात चूहे को पसंद नहीं आई कि कोई भी उसे चूहा समझ कर ही व्यवहार करे. वह सोचने लगा की ऐसे में तो दूसरे जानवरों पर भी बुरा असर पड़ेगा. लोग उसका जितना मान करते हैं, उससे अधिक घृणा और अनादर करना आरम्भ कर देंगे।

अतः चूहे ने सोचा कि क्यों न मैं इस ऋषि को ही मार डालूं. फिर न रहेगा बाँस, न बजेगी बांसुरी. यही सोचकर वह ऋषि को मारने के लिए चल पड़ा।

ऋषि ने जैसे ही क्रोध से भरे शेर को अपनी ओर आते देखा तो वे उसके मन की बात समझ गये. उनको शेर पर बड़ा क्रोध आ गया. अतः उसका घमंड तोड़ने के लिए ऋषि ने अपनी दैवीय शक्ति से उसे एक बार फिर चूहा बना दिया.

*शिक्षा:- हमें कभी भी अपने हितैषी का अहित नहीं करना चाहिए, चाहे हम कितने ही बलशाली क्यों न हो जाए, हमें उन लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दिया होता है, इसके अलावा हमें अपने बीते वक्त को भी नहीं भूलना चाहिए, चूहा यदि अपनी असलियत याद रखता तो उसे फिर से चूहा नहीं बनना पड़ता, बीता हुआ समय हमें घमंड से बाहर निकालता है..!!*

देवभूमि jknews

जीवन में हमेशा सच बोलिए, ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है!

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