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*परिजनों ने कराया नेत्रदान -तुगलराम पाल-देवी लाल कालड़ा -देवप्रकाश की आंखों से छ: जिंदगीयां होगी रोशन*

देव भूमि जे के न्यूज –

सनातन धर्म में दान का महत्व शुरू से ही रहा है।
धर्म की रक्षा करने के लिए ऋषि दधीचि ने अपनी हड्डियों का दान शस्त्रों को बनाने के लिए किया था। आज भी ऋषि दधीचि के बताएं मार्ग पर कुछ लोग चलने का काम कर रहे हैं। जिससे नेत्र विहीन लोगों की जिंदगी में उजाला हो रहा है।
विस्तृत जानकारी देते हुए नेत्रदान कार्यकर्ता व लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने बताया कि संत निरंकारी मिशन से जुड़े माला के 108 मनके की आयु पूरी कर चुके श्यामपुर निवासी तुगल राम पाल अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उनकी आंखें अब भी इस दुनिया के नजारे देखेगी। क्योंकि जनवरी माह में भतीजे सुखबीर की मृत्योपरा़त नेत्र दान के समय नेत्र दान के निर्णय से निरंकारी मिशन के नगर प्रमुख सुरेन्द्र कथुरिया जी को अवगत करा दिया था , जिन्होंने टीम को सूचित किया । ज्ञात रहे कि जानकारी में 108 वर्ष की आयु में उत्तराखंड का पहला नेत्र दान है। भारत में अब तक 113 वर्ष का नेत्रदान पुर्व में हुआ है।
नेत्र दान की कड़ी में लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि द्वारा चलाए जा रहे नेत्रदान के अभियान में वर्ष 2022से जुड़े पुर्व में दो व्यक्तियों के मृत्योपरांत नेत्र दान करा चुके नजफगढ़ दिल्ली निवासी कृष्ण कालडा ने भी अपने चाचा देवी लाल के नश्वर दुनिया से अलविदा होते समय नेत्रदान कराया हैं।डा शराफ हास्पिटल रमेश छिमवाल ने रेस्क्यू टीम के साथ निवास पर जाकर कार्निया सुरक्षित प्राप्त कर लिए।
नेत्र दान की श्रृंखला में देहरादून खुडबुडा़ निवासी आर्य समाज से जुड़े पुर्व पार्षद व केमिस्ट एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष रह चुके मिनी भईया के नाम से परिचित देव प्रकाश के पुत्र निखिल ने पिता ने नेत्र दान के निर्णय से आमोद प्रकाश को अवगत कराया। जिनकी सूचना पर हिमालयन हॉस्पिटल की नेत्रदान टीम ने निवास पर जाकर कार्निया सुरक्षित प्राप्त कर लिए। लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के सचिव राजीव खुराना के अनुसार मिशन द्वारा अब तक 392 व्यक्तियों के नेत्रदान कराएं जा चुके हैं जिससे 784 व्यक्ति लाभान्वित हो चुके हैं

देवभूमि jknews

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